दुनिया में सबसे बड़ा तप सीखना और सिखाना है – डॉ. राम मनोहर
विद्या भारती जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रदेश द्वारा आयोजित प्रांतीय प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग के पांचवें दिन विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सह क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ राम मनोहर जी ने मां सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्वलित कर विद्या भारती का लक्ष्य विषय पर अपना मार्गदर्शन दिया। महर्षि अरविन्द विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कसया कुशीनगर के वरिष्ठ आचार्य रणजीत उपाध्याय जी बैज लगाकर व अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया। अपने उद्बोधन में क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री जी ने कहा कि प्रतिदिन कुछ ना कुछ हम याद करें।मानव शरीर से हमारा परिचय और आत्मीय संबंध होना चाहिए। हमें अपने’ त्व ‘को विकसित करना चाहिए।जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि का भाव जगता है। संस्कार का पक्ष हमारी भावना से है। डॉ राममनोहर जी ने कहा कि हम अपने वैशिष्ट्य को ना भूलें। यदि हम एक आचार्य हैं तो हमें विद्या भारती का लक्ष्य , गीता का स्मरण करना,
प्रातः स्मरण, वंदना, एकात्मकता स्त्रोत, एकात्मकता मंत्र भोजन मंत्र और अपनी गीत का स्मरण होना चाहिए। इस अवसर पर जन शिक्षा समिति गोरक्ष के प्रदेश निरीक्षक जियालाल जी व आजमगढ़ संभाग निरीक्षक दिवाकर राम त्रिपाठी जी के साथ प्रांत के प्रधानाचार्य बंधु भगिनी के व प्रांतीय शिशु वाटिका प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रतिभाग की हुई बहनें भी उपस्थित रहीं।
विद्या भारती जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रदेश द्वारा आयोजित प्रांतीय प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग के पांचवें दिन विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के सह क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ राम मनोहर जी ने मां सरस्वती के चरणों में दीप प्रज्वलित कर विद्या भारती का लक्ष्य विषय पर अपना मार्गदर्शन दिया। महर्षि अरविन्द विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कसया कुशीनगर के वरिष्ठ आचार्य रणजीत उपाध्याय जी बैज लगाकर व अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया। अपने उद्बोधन में क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री जी ने कहा कि प्रतिदिन कुछ ना कुछ हम याद करें।मानव शरीर से हमारा परिचय और आत्मीय संबंध होना चाहिए। हमें अपने’ त्व ‘को विकसित करना चाहिए।जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि का भाव जगता है। संस्कार का पक्ष हमारी भावना से है। डॉ राममनोहर जी ने कहा कि हम अपने वैशिष्ट्य को ना भूलें। यदि हम एक आचार्य हैं तो हमें विद्या भारती का लक्ष्य , गीता का स्मरण करना,
प्रातः स्मरण, वंदना, एकात्मकता स्त्रोत, एकात्मकता मंत्र भोजन मंत्र और अपनी गीत का स्मरण होना चाहिए। इस अवसर पर जन शिक्षा समिति गोरक्ष के प्रदेश निरीक्षक जियालाल जी व आजमगढ़ संभाग निरीक्षक दिवाकर राम त्रिपाठी जी के साथ प्रांत के प्रधानाचार्य बंधु भगिनी के व प्रांतीय शिशु वाटिका प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रतिभाग की हुई बहनें भी उपस्थित रहीं।