🧘♂️ “योग केवल व्यायाम नहीं, एक साधना है।” 🧘♀️
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर (10+2), पक्कीबाग, गोरखपुर में भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया।...







अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर (10+2), पक्कीबाग, गोरखपुर में भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया।...
नागाजी सरस्वती विद्या मंदिर, माल्देपुर (बलिया) में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन अत्यंत उत्साह, अनुशासन एवं गरिमा के साथ...
रुपईडीहा (बहराइच) में आयोजित प्रांतीय शिशु वाटिका प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन अवसर पर विद्या भारती के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ...
| बैठक | तिथि व समय | स्थान | अपेक्षित |
|---|---|---|---|
| शिशुवाटिका पाठ्यक्रम संशोधन कार्यशाला | 2 दिसम्बर 2025 प्रातः 8:00 बजे से 3 दिसम्बर 2025 सायं 4:00 बजे तक | सरस्वती कुञ्ज् निराला नगर लखनऊ | क्षेत्र संयोजक व सह संयोजक तथा प्रतिभागी गण |
| शारीरिक शिक्षा की क्षेत्रीय बैठक | 10 दिसम्बर 2025 प्रातः 10:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक | सरस्वती कुञ्ज् निराला नगर लखनऊ | विषय के प्रान्त संयोजक व सह संयोजक |
| अभिलेखागार की क्षेत्रीय बैठक | 11 दिसम्बर 2025 प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक | सरस्वती कुञ्ज् निराला नगर लखनऊ | क्षेत्रीय व प्रान्तीय विषय के संयोजक व सह संयोजक |
| विद्या भारती पूर्वी उ0प्र0 की कार्ययोजना बैठक | 13 दिसम्बर 2025 की सायं 5:00 बजे से 15 दिसम्बर 2025 सायं 5:00 बजे तक | सरस्वती बी0एड महाविद्यालय रुमा कानपुर | कार्य समिति के सदस्य व पूर्ण कालिक |
विद्या भारती मूल्य-आधारित और समावेशी शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र का निर्माण करता है| विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान आज देश के सबसे बड़े शैक्षणिक आंदोलनों में से एक है, जो गुणवत्तापूर्ण (गुणात्मक) और संस्कृति-युक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्या भारती आज संपूर्ण देश में 684 जिलों में 12,118 विद्यालयों का संचालन कर रही है । इसके अतिरिक्त, संस्था देशभर में 8,000 से अधिक अनौपचारिक शिक्षा केंद्र भी संचालित कर रही है, जो समाज के वंचित वर्ग को नि:शुल्क शिक्षा सुविधा प्रदान कर रहे हैं । वर्तमान में 35.33 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं विद्या भारती के स्कूलों में अध्ययनरत हैं और उन्हें 1.53 लाख से अधिक शिक्षक शिक्षित कर रहे हैं।
विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रवाद पर आधारित शिक्षा प्रणाली का प्रमुख संस्थान है। इसकी नींव 1952 में गोरखपुर के पक्कीबाग़ में पहले “सरस्वती शिशु मंदिर” के रूप में रखी गई, जो संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करने का केंद्र बना। 1958 में शिशु शिक्षा प्रबंध समिति का गठन हुआ, और 1977 में इसे अखिल भारतीय पहचान मिली, जिससे विद्या भारती देश का सबसे बड़ा गैर-सरकारी शिक्षा संगठन बन गया। यह संगठन राष्ट्रवादी शिक्षा, संस्कार, योग, संगीत, और चरित्र निर्माण को प्राथमिकता देता है। विद्या भारती भारतीय शिक्षा दर्शन को समृद्ध करने के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा को भी बढ़ावा देती है।
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