
नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के पंचम दिवस में श्री हेमचन्द्र जी ने पंचकोशीय विकास की दी गूढ़ व्याख्या

विद्या भारती कानपुर प्रान्त द्वारा आयोजित दस दिवसीय नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग 2025 के पंचम दिवस के प्रथम सत्र में प्रमुख मार्गदर्शक श्री हेमचन्द्र जी (क्षेत्रीय संगठन मंत्री, विद्या भारती पूर्वी क्षेत्र उत्तर प्रदेश) ने “सर्वांगीण समग्र विकास की कल्पना” विषय पर गहन उद्बोधन दिया।

उदघाटन सत्र में मा0 हेमचंद्र जी(क्षेत्रीय संगठन मंत्री, विद्या भारती पूर्वी क्षेत्र), मा0 रजनीश जी(प्रान्त संगठन मंत्री, विद्या भारती कानपुर प्रान्त), श्री अयोध्या प्रसाद मिश्रा(प्रदेश निरीक्षक, विद्या भारती कानपुर प्रान्त), श्री विजय अवस्थी(विभाग कार्यवाह, फर्रुखाबाद विभाग रा0 स्व0 संघ) ,गौरव अग्रवाल जी व्यवस्थापक विद्या मंदिर श्यामनगर फर्रुखाबाद एवं श्री संजीव चौहान(प्रबंधक, स0 शि0/वि0 म0 सेनापति ने दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन किया।

अपने सत्र में उन्होंने बताया कि शिशु का पंचकोशात्मक विकास ही हमारी भारतीय शिक्षा प्रणाली का मूल उद्देश्य है।
यह पाँच कोश हैं – अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय तथा आनंदमय। उन्होंने कहा कि शारीरिक विकास हेतु अन्नमय कोश, प्राण ऊर्जा के संतुलन हेतु प्राणमय कोश, चित्त व मानसिक स्थिरता हेतु मनोमय कोश, विवेक व निर्णय क्षमता हेतु विज्ञानमय कोश और आत्मिक शुद्धता हेतु आनंदमय कोश का विकास आवश्यक है।