दिनांक 2 अगस्त 2025 को विद्या भारती कानपुर प्रांत की विद्वत परिषद की प्रांतीय बैठक रूमा कानपुर में डॉ० प्रदीप जी क्षेत्रीय सहसंयोजक के मार्गदर्शन में आहूत की गई।
सर्वप्रथम सरस्वती पूजन एवं वंदना के साथ बैठक प्रारंभ की गई सर्वप्रथम उपस्थित समस्त सदस्यों ने अपना परिचय दिया तत्पश्चात विद्वत परिषद के प्रांत प्रमुख श्री नरेंद्र जी प्रधानाचार्य सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज फतेहपुर ने आज होने वाली बैठक का उद्देश्य, बैठक की योजना पूर्व में क्या कार्य किए गए इस पर प्रमुखता से प्रकाश डाला इसके बाद प्रांत निरीक्षक कानपुर प्रांत श्री अयोध्या प्रसाद मिश्रा जी ने विद्वत परिषद के गठन उसकी कार्य योजना तथा उससे होने वाले परिणामों पर विस्तृत प्रकाश डाला आदरणीय मिश्र जी ने कहा कि जब विद्वान लोगों का विचार आता है तो समाज की दिशा बदलती है तथा संभाग निरीक्षक श्री अजय दुबे जी ने भी बैठक को संबोधित किया ।
उपस्थित सभी विद्वान प्रधानाचार्यो ने पूर्व में किए गए कार्यों का लेखा-जोखा सबके समक्ष प्रस्तुत किया और बताया कि अभी तक इन इन जगहों पर बैठकर कराई गई हैं तथा मुख्य वक्ता के रूप में समाज के प्रतिष्ठित लोग रहे तथा उपस्थित लोगों की उक्त बैठकों में संख्या भीबताई ।
प्रांतीय समिति को संबोधित करते हुए विद्वत परिषद के क्षेत्रीय सह संयोजक डॉ० प्रदीप ने कहा कि “विद्वत परिषद का कार्य प्रशिक्षण नहीं बल्कि जागरण और प्रबोधन है ” उन्होंने कहा कि हमें ऐसे लोगों को जोड़ना है जिसकी समाज में स्वीकारता है जिससे समाज में सकारात्मक सोच विकसित की जाये एवं समाज को राष्ट्रीय दृष्टिकोण दिया जाए तथा पाश्चात्य जीवन पद्धति से मोह भंग हो तथा अपने आत्मनिर्भर होने का गौरव का एहसास दिलाया जाए हम पूर्व से ही आत्मनिर्भर रहे हैं हम अपने छोटे बड़े समस्त कार्यों को स्वयं से संपादित करते रहे हैं यह आत्मनिर्भरता की बेसिक समझ है। भाई साहब ने विद्वत परिषद के कार्यों को दो भागों में विभक्त किया पहले समाज के लिए कार्य तथा दूसरा विद्यालय स्तरीय कार्य आगे बताया कि हम इन कार्यों को तीन भागों में विभक्त करके कर सकते हैं पहले मंत्र दूसरा तंत्र तीसरा पंच । मंत्र से आशय बैठक के विचार से है तथा तंत्र का आशय बैठक की रणनीति से है तथा पंच का मतलब कार्यकर्ताओं को इकट्ठा करने से है बैठक करने के लिए चार मूलभूत चीजों के बारे में भी चर्चा की पहले बैठक का बैनर जिसमें विद्वत परिषद स्पष्ट रूप से अंकित हो दूसरा बैठक का विषय तीसरा बैठक में प्रमुख वक्ता तथा चौथा सुनने वाले कार्यकर्ता और और पांचवी यदि व्यवस्था हो सके तो स्वल्पाहार ।
डॉक्टर प्रदीप ने आगे किस तरीके से बैठकों की कार्य योजना , कौन-कौन से विषय रखे जा सकते हैं और किस तरीके के मुख्य वक्ता का चयन करना चाहिए पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला तथा सभी लोगों से यह निवेदन किया कि भोजन अवकाश के पश्चात सभी लोग अगले कार्यक्रम की रूपरेखा बनाकर अभी प्रस्तुत करेंगे तत्पश्चात भोजना अवकाश हो गया।
भोजन अवकाश के पश्चात पुनः बैठक प्रारंभ हुई जिसमें समस्त आए हुए प्रधानाचार्यो ने अपने-अपने संकुल की कार्य योजना , बैठक का विषय बैठक की तिथि तथा प्रमुख वक्ता एवं संभावित संख्या भी प्रस्तुत की उक्त बैठक का समापन प्रदेश निरीक्षक श्री अयोध्या प्रसाद मिश्रा जी ने किया तथा सभी उपस्थित लोगों को प्रांत प्रमुख श्री नरेंद्र जी भाई साहब ने धन्यवाद ज्ञापित किया उक्त बैठक में कन्नौज से श्री जितेंद्र पांडे जी ,दिबियापुर से श्री राजेश गुप्ता जी , बांदा से श्री रमेश जी, शिशु मंदिर बांदा से श्री नरेंद्र अवस्थी जी, तथा बांदा से ही सेवानिवृत्ति प्रधानाचार्य श्री सत्यनारायण जी , उरई से श्री अतुल कुमार बाजपेई जी, हमीरपुर से श्री राम प्रकाश गुप्त जी ,झांसी से श्री छत्रसाल जी ,संभाग निरीक्षक जन शिक्षा समिति श्री विजय शंकर जी ,जिला प्रमुख जन शिक्षा समिति फतेहपुर श्री आशुतोष कुमार दुबे जी कानपुर से श्री रत्नेश जी तथा फतेहपुर से प्रणवीर सिंह उपस्थित रहे।