CBSE द्वारा सेकेंडरी शिक्षा में त्रिभाषा सूत्र के अंतर्गत दो भारतीय भाषाओं के अध्ययन को प्रोत्साहित करने का निर्णय स्वागतयोग्य एवं प्रशंसनीय है।
अधिक भाषाओं का ज्ञान विद्यार्थियों की सोचने, विश्लेषण करने एवं समस्या-समाधान क्षमता को सशक्त बनाता है।
भारतीय भाषाओं का अध्ययन छात्रों को अपनी जड़ों, परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए उनमें भारतीयता के प्रति गर्व और आत्मीयता की भावना को मजबूत करता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप मातूभाषा एवं भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों को भी सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
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देशराज शर्मा
राष्ट्रीय महामंत्री
विद्या मंदिर अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान
अनेक भाषाएं, एक भारत – समृद्ध भारत, समर्थ भारत








