आनंदी देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सीतापुर में आयोजित पंद्रह दिवसीय नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग का समापन प्रेरणादायी वातावरण में सम्पन्न हुआ।
मुख्य वक्ता डॉ. सौरभ मालवीय जी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि चरित्र, व्यक्तित्व एवं राष्ट्रभाव का निर्माण है। भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और ज्ञान परंपरा से युक्त शिक्षा ही एक श्रेष्ठ, समर्थ एवं संपन्न भारत का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
उन्होंने आचार्यों का आह्वान किया कि वे नई पीढ़ी में संस्कार, कर्तव्यबोध और राष्ट्रनिष्ठा का संचार करते हुए भारत-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लें।
“सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना और भारतीय जीवनदृष्टि के साथ राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में समर्पित आचार्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

















