समापन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि आचरण निर्माण करना है। उन्होंने बताया कि वंदना, भोजन मंत्र, व्यवहार और विचार-विमर्श के माध्यम से 15 दिन के प्रशिक्षण में आचार्यों के मन, चित्त और वाणी में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास किया गया।
स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की शक्ति उसकी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर करती है। समाज के अनुकूल शिक्षा ही राष्ट्र को समृद्ध और शक्तिशाली बनाती है।
भारत को केवल भू-भाग नहीं, बल्कि आनंद, ज्ञान, मुक्ति और परोपकार का प्रतीक बताते हुए उन्होंने ‘संबंध’ और ‘कर्तव्य’ आधारित संस्कृति पर जोर दिया।
कार्यक्रम में प्रदेश निरीक्षक अवध प्रांत श्री रामजी सिंह, पूर्णकालिक अधिकारी बंधु एवं संभाग निरीक्षक सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
अंत में विद्यालय के अध्यक्ष *श्री सुभाष चन्द्र अग्निहोत्री* ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षक आचार्यों एवं कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
समापन अवसर पर नवचयनित आचार्यों ने शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित योगदान देने का संकल्प लिया।











