रुपईडीहा (बहराइच) में आयोजित प्रांतीय शिशु वाटिका प्रशिक्षण वर्ग के उद्घाटन अवसर पर विद्या भारती के क्षेत्रीय मंत्री डॉ. सौरभ मालवीय ने बाल शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि बाल मन अत्यंत कोमल, जिज्ञासु एवं ऊर्जावान होता है, इसलिए उन्हें गतिविधि-आधारित एवं अनुभवपरक शिक्षा देना आवश्यक है। विद्या भारती शिशु वाटिका के माध्यम से भारतीय मनोविज्ञान आधारित शिक्षा पद्धति का सफल संचालन कर रही है, जिससे बच्चों का स्वाभाविक एवं सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो रहा है।
इन्हीं के माध्यम से बच्चों में सृजनात्मकता, आत्मविश्वास एवं सामाजिकता का विकास हो रहा है।
डॉ. मालवीय ने कहा कि शिशु वाटिका शिक्षा का उद्देश्य केवल अक्षरज्ञान नहीं, बल्कि शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक विकास है।













