सिद्धार्थ नगर (तेतरी बाजार) – हम विद्यालय चलाने के लिए विद्यालय नहीं चला रहे हैं विद्यालय चलाने वाले समाज में बहुत से लोग हैं, हमारा उद्देश्य पैसा कमाना भी नहीं हम पंच प्राणों के विकास के लिए काम कर रहे हैं जो भारतीय संस्कृति व समाज पर आधारित है । विद्या भारती के विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने के लिए नहीं, बल्कि समाज के भविष्य निर्माता संस्कारित बालकों के निर्माण हेतु संचालित किए जा रहे हैं। यदि हमारे अंदर हुनर होगी तो हमारी कदर होगी। उक्त बातें विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री हेमचंद जी ने कही।
वह विद्या भारती शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत द्वारा आयोजित चार दिवसीय प्रधानाचार्य वार्षिक कार्य योजना बैठक के तीसरे दिन प्रथम सत्र (वंदना सभा) में संबोधित कर रहे थे। आगे उन्होंने कहा कार्य योजना का केंद्र बालक होना चाहिए, ताकि शिक्षा के माध्यम से उसका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। विद्यालय में अच्छे संसाधन है पर बच्चे नहीं है वह विद्यालय नहीं कहा जा सकता हमारे विद्यालय के केंद्र बिंदु हमारे छात्र छात्राएं ही है।
उन्होंने भारतीय शिक्षा पद्धति की महान परंपरा की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि छात्रों को भारतीय संस्कृति, मूल्यों और संस्कारों से जोड़ना आज की आवश्यकता है। हमारा उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम की पूर्ति भी नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास है। उन्होंने युगानुकूल शिक्षा व्यवस्था पर बल देते हुए कहा कि प्रत्येक युग में संस्कारयुक्त व्यक्तित्व की आवश्यकता रही है। उदाहरण स्वरूप उन्होंने सत्य के कारण ही राजा हरिश्चंद्र के रूप में जाने जाते हैं सत्य बोलना भी संस्कार का एक बड़ा हिस्सा है, त्रेता युग में राम अच्छे संस्कारों से ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बने तथा द्वापर युग के पांडवों व कौरवों का उल्लेख किया। कहा हमारा विद्यालय समाज एवं मातृभाषा आधारित शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है।” उन्होंने इंगित किया कि अंग्रेजी का ज्ञान आवश्यक है, लेकिन अंग्रेजियत का अंधानुकरण नहीं होना चाहिए। आज के समाज में अंग्रेजी माध्यम के बढ़ते प्रभाव के बीच भी संस्कार युक्त शिक्षा की विशेष आवश्यकता है।
विद्या भारती विद्यालय बालकों के पंचप्राण छात्र, अभिभावक, शिक्षक, पूर्व छात्र और प्रबंध समिति के विकास हेतु कार्य कर रहे हैं। विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था भारतीय संस्कृति और समाज की गहरी जड़ों से जुड़ी हुई है। सभी उपस्थित प्रधानाचार्य बन्धुओं ने संगठन मंत्री के विचारों को आत्मसात करते हुए विद्यालयों में राष्ट्र निर्माण की भावना से कार्य करने का संकल्प लिया। अतिथियों का परिचय संकुल प्रमुख गोविंद सिंह ने कराया। उक्त अवसर पर शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत के प्रदेश निरीक्षक श्री राम सिंह जी, संभाग निरीक्षक श्री कन्हैया चौबे जी, संस्कृति बोध परियोजना के प्रांत संयोजक दिवाकर जी समेत गोरक्ष प्रांत के सभी 10 जनपदों के प्रधानाचार्यों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
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