काशी प्रान्त
प्रकल्प - ग्राम भारती परतोष
ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा का प्रकल्प :- प्रकल्प प्रारम्भ करने की योजना एवं उद्देश्य सन् 1989 में श्रद्धेय भाऊराव देवरस की प्रेरणा से स्व०राम प्रताप सिंह जी के नेतृत्व में स्व०वंशराज सिंह जी ने हनुमत इण्टर कालेज धम्मौर की कृषि फार्म के नाम से दर्ज परती, उसरीली एवं कटीली झाड़ियों से युक्त भूमि को जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश को 99 वर्षों के लिए लीज पर दे दिया जिस भूमि पर अमेठी जैसे अति पिछड़े क्षेत्र में शिक्षा एवं संस्कार के प्रचार प्रसार के साथ-साथ, आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बन्धुओं के जीवन शैली, रहन-सहन में सुधार करना तथा कृषि एवं गोपालन के द्वारा समृद्धशाली जीवन जीने की अभिवृत्ति का विकास करना एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करने के साथ-साथ हर प्रकार से ग्राम विकास की अवधारणा को लेकर यह ग्रामीण क्षेत्र का प्रकल्प कार्य कर रहा है।
विकास यात्रा :- सन् 1989 में अगस्त माह में इसका भूमि पूजन श्रद्धेय भाऊराव देवरस जी के कर कमलों द्वारा हुआ और सर्वप्रथम जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश का कार्यालय स्थापित हुआ। इसी के साथ प्राथमिक स्तर का एक विद्यालय सरस्वती शिक्षा मन्दिर के नाम से प्रारम्भ हुआ। सन् 1991 में यहाँ एक आचार्य प्रशिक्षण विद्यालय भी ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करने वाले आचार्य बन्धुओं को प्रशिक्षण देने के लिए प्रारम्भ किया गया जो 2014 तक अनवरत चला परन्तु शासन की मान्यता के अभाव में इसे 2014 में बन्द कर दिया गया। सन् 1995 में विद्यालय जूनियर स्तर का हो गया तथा अगस्त 1995 में ही यहाँ माधवराव देवड़े जी की प्रेरणा से एक छात्रावास भी प्रारम्भ किया गया क्रमशः विद्यालय हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट स्तर की मान्यता प्राप्त कर लिया साथ ही 2020 में CBSE से भी इण्टर तक मान्यता हो गयी इसी के साथ ही 1995 में एक गोशाला माधव गोशाला के नाम से स्थापित की गयी गोशाला के गोबर एवं गोमूत्र से ऊसर एवं परती भूमि को श्रम पूर्वक उपजाऊ बनाया गया।
प्रभाव :- प्रकल्प का प्रभाव आस-पास के गाँव पर साफ दिखाई देता है यहाँ पर 77 गाँव के बच्चे तथा बिहार प्रान्त के भी बच्चे भी छात्रावास में पढ़ने आते हैं प्रकल्प के विभिन्न आयामों का प्रभाव इस प्रकार है-
(क) विद्यालय :- आस पास के 77 गाँव व 8 जनपदों एवं बिहार के बच्चे भी यहाँ शिक्षा एवं संस्कार ग्रहण करते हैं।
(ख) गोशाला :- माधव गोशाला के माध्यम से आस पास के 8 गाँव में पशु पालन दुग्ध उत्पादन एवं नस्ल सुधार के कार्य हुए हैं। किसानों / पशु पालकों की आय बढ़ी है, यहाँ के माध्यम से किसानों के दूध का उचित मूल्य दिलाया जाता है।
(ग) कृषि :- जैविक कृषि को बढ़ावा देने का कार्य आस-पास के गाँवों में प्रकल्प के माध्यम से किया जाता है। इस हेतु अनेक प्रकार का प्रशिक्षण किसानों को दिया जाता है जैसे जैविक खाद बनाने (वर्मी कम्पोस्ट, नेडेप कम्पोस्ट, जीवामृत, घनजीवामृत तथा दवायें वीजामृत, ब्रहमास्त्र, आग्येयास्त्र आदि।
(घ) कौशल विकास :- ऑवले का उत्पाद अचार, मुरब्बा का निर्माण एवं विक्रय करने का प्रशिक्षण समय-समय पर छात्रों एवं ग्रामीण महिलाओं को दिया जाता है। सिलाई-कढ़ाई आदि।
(ड) फूलपत्ती विकास :- यहाँ फूलपत्ती एवं पौधों की नर्सरी तथा फलदार वृक्षों की कलम लगाना भी सिखाया जाता है। फलदार वृक्षों का वितरण भी किया जाता है।
(च) स्वास्थ्य :- समय-समय पर पर कैम्प लगाकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं दवा वितरण का कार्य भी प्रकल्प द्वारा किया जाता है जिससे प्रकल्प का प्रभाव समाज में बढ़ता जा रहा है।
समाज परिवर्तन प्रकल्प के माध्यम से आस-पास के गाँवों में अनेक प्रकार के परिवर्तन आये हैं जैसे शिक्षा के प्रति जागरूकता, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता एवं स्वस्थ जीवन के प्रति रुझान, किसानों एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि तथा इसके माध्यम से रोजगार में बढ़ावा, फलदार वृक्षों की संख्या में बढ़ोत्तरी आदि।
चुनौतियाँ :- आस-पास के क्षेत्रों में प्रकल्प के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती है वह है समाज का विभिन्न जाति विरादरी में बटे होना तथा वैचारिक संघर्ष एवं स्वास्थ्य (विषेषकर ऑख की बीमारी) तथा बालिकाओं की उच्च शिक्षा हेतु संस्थानों का अभाव इस चुनौती से निपटने के लिए भी प्रकल्प के विभिन्न आयामों द्वारा कार्य चल रहा है।
प्रकल्प प्रभारी :- श्री राजबहादुर दीक्षित, मोबाइल – 8318330551
पता :- ग्राम भारती परतोष, धम्मौर, जनपद-अमेठी
अवध प्रान्त
प्रकल्प :- चन्दन चौकी
प्रतापनारायण मिश्र स्मारक सरस्वती विद्या मंदिर चन्दनचौकी विद्यालय लखीमपुरखीरी थारू जनजाति क्षेत्र में नेपाल भारत की सीमा पर संचालित है। चन्दनचौकी भारत नेपाल सीमा पर स्थित है। लखीमपुर सीमावर्ती 2 विकास खण्ड पलिया एवं निघासन है जिस गाँवों में थारू जनजाति निवास करती है। चन्दनचौकी, लखीमपुर की सीमावर्ती तहसील पलिया से 25 किलोमीटर नेपाल सीमा तक साखू सागौन के जंगल से आच्छादित राष्ट्रीय उद्यान दुधवा नेशनल पार्क और नेपाल सीमा के मध्य स्थित है। जिसमें थारू जनजाति के कुल 802 भैया/बहिन शिक्षा प्राप्त करते है। उक्त प्रकल्प में छात्रावास संचालित है जिसमें 93 छात्र है। सम्पूर्ण थारू जनजाति के 42 गॉव हैं जिसमें 40 गॉव के भैया बहिन विद्यालय में अध्ययन करते है। 1989 में तत्कालीन प्रांत प्रचारक मा० प्रताप नारायण मिश्र जी द्वारा सीमावर्ती प्रवास के दौरान थारु जनजाति के लोगों को जुआ खेलते, नशा करते देखकर एवं बाल विवाह जैसी समताओं का निदान, शिक्षा के माध्धाम से करने के संकल्प के साथ हुई।
प्रारम्भ में पलिया तहसील के मा० संघचालक श्रीमान मुल्कराज कत्पाल, श्री राधेश्याम जिंदल, श्रीफूल सिंह राणा, श्री जयमल राणा द्वारा एक झोपड़ी डालकर संस्कार केन्द्र चलाया गया | 05 वर्ष तक झुग्गी झोपड़ी में संस्कार केन्द्र चलते हुए विद्यालय का स्वरूप बना सन 1994 में श्री रामगोपाल एवं उनके भाइयों द्वारा 1 एकड़ भूमि पट्टे पर प्रदान की गयी। तत्कालीन प्रदेश निरीक्षक श्रीमान बेचन सिंह ने अवध प्रान्त के विभिन्न स्थानों से एकत्र आर्थिक सहयोग और श्री रामनाथ कोविन्द एवं श्री राजनाथ सूर्य की सांसद निधि से 5 कमरों का छोटा भवन बनकर तैयार हुआ और विद्यालय ने अपने स्वरूप को ग्रहण किया | सन 1995 में श्री हीरालाल जी को प्रकल्प प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया | सीमा सुरक्षा बल, वन विभाग के अधिकारियों द्वारा इस विद्यालय को आधार मानते हुए सीमा की सुरक्षा का केन्द्र माना जाता है।
श्री हीरालाल जी की नियुक्ति के बाद एक निःशुल्क छात्रावास प्रारम्भ किया गया | जिसमें सभी बच्चे अपने घर से बिस्तर, अनाज लाते थे और मिट्टी के चूल्हे पर भोजन बनाते थे। सामूहिक भोज, संघ के उत्सव एवं संत सम्मेलन प्रारम्भ हुए जिससे विद्यालय पर अच्छा प्रभाव पड़ा और जो लोग पहले नशा करते थे वह लोग अब सम्मान करने लगे उत्सवों और पर्वो में आचार्यों को आमन्त्रित करने लगे ।
नेपाल के अधिकारियों की बैठके विद्यालय परिसर में होती है। दोनों देशों के आधिकारी विद्यालय को अच्छा केन्द्र मानते है। विद्यालय के भैया बहन खेलकूद समारोह में अखिल भारतीय स्तर तक प्रतिभाग करते हैं। विद्यालय के पास आकर्षक भवन है। वर्तमान में कक्षा 12 तक विद्यालय मान्यता प्राप्त है। विद्यालय में कुल 22 आचार्य, आचार्यायें कार्यरत हैं। महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा विद्यालय को एक सुसज्जित कम्प्यूटर प्रयोगशाला प्रदान की गयी । विद्यालय के पास कुल 3 एकड़ भूमि है । विद्यालय में 802 भैया बहन अध्ययनरत है। छात्रावास में 80 भैया रहते है सबके लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था हेतु एक सुसज्जित रसोई है। सिलाई कढ़ाई प्रशिक्षण केन्द्र चलाना छात्रावास के बच्चों द्वारा सब्जियां उगाना उद्यान की निराई करना | थारू जनजाति के लोक नृत्य लोक संगीत, हस्तनिर्मित वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाना । खेल कूद समारोह | जागरूकता रैली निकालना ।
रक्षाबंधन के समय S.S.B के सैनिकों एवं गाँवो में विद्यालय की बहनों द्वारा राखी बांधना । संगठन के अधिकारी विद्यालय के नाम भूमि इण्टरमीडिएट की मान्यता हेतु प्रयासरत होकर मान्यता ली गयी। शताब्दी वर्ष पर सभी 42 गाँवो में संस्कार केन्द्र चलाने की योजना है जिसके संचालन हेतु एक सवैतनिक पूर्णकालिक कार्यरत है।
प्रकल्प प्रभारी: श्री बलदेव श्रीवास्तव मोबाइल-8707851863
पता: प्रतापनारायण मिश्र स्मारक सरस्वती विद्या मंदिर चन्दनचौकी, लखीमपुर-खीरी।
