जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश द्वारा आयोजित सरस्वती शिक्षा मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ग्रामभारती, परितोष, अमेठी में पांच दिवसीय पंचपदीय अधिगम पद्धति स्रोत व्यक्ति कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के द्वितीय दिवस के उद्घाटन सत्र में अतिथि महानुभावों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के उपरांत वंदना संपन्न हुई।

प्रदेश प्रचार प्रमुख संतोष मिश्र के अनुसार भारतीय शिक्षा परिषद के सचिव एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के प्रशिक्षण प्रमुख दिनेश कुमार सिंह का मार्गदर्शन काशी प्रदेश से आए हुए 45 आचार्य, प्रधानाचार्य वन्धुओं को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय एवं प्रांतीय समिति के अध्यक्ष गोविंद सिंह चौहान ने किया। मुख्य अतिथि प्रदेश मंत्री अनुग्रह नारायण मिश्र जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश, रोहित चौधरी प्रांतीय सह मंत्री, राम अकबाल द्विवेदी जिला मंत्री सुल्तानपुर,संभाग निरीक्षक वीरेंद्र सिंह एवं शेषमणि तिवारी रहे। अतिथियों का परिचय प्रदेश निरीक्षक राज बहादुर दीक्षित ने कराया । सभी मंचस्थ अधिकारियों का अंग वस्त्र, बैज एवं रोली लगाकर स्वागत किया गया।

सचिव दिनेश सिंह ने बताया कि स्रोत व्यक्ति कार्यशाला का तात्पर्य यहां की सभी बातों को विद्यालय स्तर तक ले जाना है। शिक्षा का चार स्तर में विभाजन किया गया है। फाउंडेशन स्तर, प्रारंभिक स्तर , मिडिल स्तर तथा सेकेंडरी स्तर । शिक्षा का कार्य बालक के व्यवहार में परिवर्तन लाना है, बालक के अंतर्गत शक्तियों एवं देवत्व का विकास करना, उसका समग्र एवं सर्वांगीण विकास करना,उसे नर से नारायण बनाना है। विनोबा भावे ने कहा था- छात्र को आचार्य पारायण तथा आचार्य को छात्र पारायण होना चाहिए। और दोनों को ज्ञान प्राण होना चाहिए । जब हमारी शिक्षा आनन्दमयी होगी तभी सुग्राही होगी,और तभी हम राम तथा कृष्ण को उत्पन्न कर पाएंगे। विनोबा जी ने कहा था कि बच्चा 70% समाज से,20% स्वयं से और 10% आचार्य से सीखता है। बच्चों को उचित वातावरण देना नितांत आवश्यक है। बच्चा ज्ञान अर्जित करता है, उसे ज्ञान दिया नहीं जाता । बच्चों में सीखने की जिज्ञासा उत्पन्न करना और उसमें सीखने का जुनून उत्पन्न करना आचार्य का कार्य है। अधीति,बोध, अभ्यास ,प्रयोग और प्रसार पंचपदीय शिक्षण के पांच पद हैं।