विद्या भारती का लक्ष्य बालक का सर्वांगीण विकास: माननीय हेमचन्द्र जी
*सुल्तानपुर, 28 मई 2025:* सरस्वती विद्या मंदिर विवेकानंद, सुल्तानपुर में चल रहे काशी प्रांत के 10 दिवसीय प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग 2025 का दूसरा दिन आज विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री, आदरणीय हेमचंद जी के प्रेरणादायक उद्बोधन से ओत-प्रोत रहा। उन्होंने ‘पंचकोष’ की अवधारणा पर एक विस्तृत व्याख्यान दिया, जो छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्या भारती के मूल दर्शन को दर्शाता है।
प्रशिक्षण वर्ग के द्वितीय दिवस का शुभारंभ पारंपरिक रूप से मां सरस्वती के सम्मुख *दीपार्चन, पुष्पर्चन एवं वंदन* से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आदरणीय हेमचंद जी का परिचय ज्वाला देवी सिविल लाइंस के प्रधानाचार्य श्रीमान विक्रम बहादुर सिंह परिहार जी ने एवं सम्मान ज्वाला देवी सिविल लाइंस के प्रधानाचार्य श्रीमान विक्रम बहादुर सिंह परिहार, विवेकानंद सुल्तानपुर के प्रधानाचार्य श्रीमान राकेश मणि त्रिपाठी और प्रधानाचार्य वर्ग के संयोजक श्रीमान सुमन्त पांडेय द्वारा किया गया। इस अवसर पर श्रीमान इंद्रजीत त्रिपाठी भी उपस्थित रहें।
अपने उद्बोधन में, आदरणीय क्षेत्रीय संगठन मंत्री जी ने *बालक के सर्वांगीण समग्र विकास की कल्पना* पर गहन चर्चा की। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें *विद्यार्थियों के सभी पहलुओं का विकास* शामिल है। इसी कड़ी में, उन्होंने *पंचकोष* की अवधारणा को विस्तार से समझाया। पंचकोष, भारतीय दर्शन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है जो मानव अस्तित्व के पांच आयामों (अन्नमय कोष, प्राणमय कोष, मनोमय कोष, विज्ञानमय कोष और आनंदमय कोष) को दर्शाता है। हेमचंद जी ने बताया कि किस प्रकार इन पांचों कोषों का संतुलन और विकास एक स्वस्थ, सुखी और पूर्ण व्यक्ति के निर्माण के लिए आवश्यक है।
यह प्रशिक्षण वर्ग प्रधानाचार्यों को विद्या भारती के शैक्षिक दृष्टिकोण को गहराई से समझने और उसे अपने विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद करेगा, जिससे छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।


















