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विद्या भारती, पूर्वी उ0प्र0
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शिक्षा का उद्देश्य नर से नारायण – मा० हेमचन्द्र जी

शिक्षा का उद्देश्य नर से नारायण – मा० हेमचन्द्र जी

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विद्या भारती जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत द्वारा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज आंनदनगर ,महराजगंज में आयोजित नव चयनित आचार्य प्रशिक्षण कार्यशाला वर्ग के आठवें दिन का वंदना सत्र में विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री आदरणीय हेमचंद जी ने दीप प्रज्ज्वलन व पुष्पार्चन किया ।प्रांतीय प्रशिक्षण प्रमुख दिवाकर राम त्रिपाठी जी ने परिचय कराते हुए गत सात दिनों में छत्तीस कालांशो के माध्यम से शिक्षण प्रशिक्षण का एक संक्षिप्त वृत्त निवेदन प्रस्तुत किया। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज आंनदनगर ,महराजगंज के प्रधानाचार्य गोविंद चतुर्वेदी ने बैज लगाकर व अंगवस्त्र भेंट कर संगठन मंत्री जी का स्वागत किया। हेमचंद जी के द्वारा बालक के सर्वांगीण विकास की संकल्पना के साथ व्यक्ति से परमेष्ठिगत विकास तक के विषय अपना प्रेरणादायक मार्गदर्शन नव चयनित आचार्य प्रशिक्षण कार्यशाला वर्ग में देते कहा गया कि विद्या भारती का ध्येय ही है ‘विद्या ददाति विनयम्’ । जब शिक्षा पूर्ण होती है तो विनम्रता आती है।जब बालक का पंचकोषात्मक विकास होगा तो व्यक्तित्व में निखार आयेगा। मनुष्य धर्म के आधार पर चलता है। दर्शन का अर्थ दृष्टि से है। धनार्जन का दसवां हिस्सा हमें धार्मिक कार्यों के लिए दान करना चाहिए। भारत को देवताओं ने बनाया है।प्राण बलवान होने पर व्यक्ति सक्रिय होता है। शिक्षा का उद्देश्य नर से नारायण बनाना है इसी के साथ
व्यक्ति का परमेष्ठिगत विकास के के बारे में बताते हुए क्षेत्रीय संगठन मंत्री विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र आदरणीय हेमचंद जी ने कहा कि समाज के साथ व्यक्ति का सामंजस्य होना चाहिए। हमारे लिए देश सर्वोपरि है। अतः हमें देश हित में काम करना चाहिए।
                                                          अयं निज: परोवेति गणना लघुचेतसाम।
                                                          उदार चरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।।
विद्या भारती का ध्येय ही है ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का है।इस अवसर पर जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत के प्रदेश निरीक्षक आदरणीय जियालाल जी,प्रधानाचार्य वृजराज मिश्र जी, रवीन्द्र पटेल जी, कृष्ण मोहन पांडेय जी प्रशिक्षक रूप में उपस्थित रहे । प्रधानाचार्य अशोक मिश्र जी प्रांत प्रचार संयोजक जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत ने आज के कार्यक्रम का संचालन किया ।

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विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश

विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रवाद पर आधारित शिक्षा प्रणाली का प्रमुख संस्थान है। इसकी नींव 1952 में गोरखपुर के पक्कीबाग़ में पहले “सरस्वती शिशु मंदिर” के रूप में रखी गई, जो संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करने का केंद्र बना। 1958 में शिशु शिक्षा प्रबंध समिति का गठन हुआ, और 1977 में इसे अखिल भारतीय पहचान मिली, जिससे विद्या भारती देश का सबसे बड़ा गैर-सरकारी शिक्षा संगठन बन गया। यह संगठन राष्ट्रवादी शिक्षा, संस्कार, योग, संगीत, और चरित्र निर्माण को प्राथमिकता देता है। विद्या भारती भारतीय शिक्षा दर्शन को समृद्ध करने के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा को भी बढ़ावा देती है।

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