विद्या भारती जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रदेश द्वारा आयोजित प्रांतीय प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग के चौथे दिन दूसरे सत्र में विद्या पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचंद जी का मार्गदर्शन प्रधानाचार्य बंधुओं को प्राप्त हुआ। पंचकोषात्मक विकास के बारे में आपके द्वारा बताया गया कि शिक्षा का प्रथम उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास करना है। बालक शारीरिक दृष्टि से सबल हो तथा प्राणिक दृष्टि से संयमी हो। भारत माता को जगत जननी कहा गया है।भारत चिरंजीवी है। प्राणमय कोश का स्रोत सूर्य है।,प्राण बलवान हो,प्राण संतुलित हो तथा प्राण का एकाग्र होना भी चाहिए।मनोमय कोश के बारे में बताते हुए आपने बताया कि मन ,प्राण से भी सूक्ष्मतम है।मन शांत हो,मन एकाग्र हो तथा मन में अनासक्ति भाव भी होना चाहिए। भारतीय संगीत व्यक्ति को अंतर्मुखी बनाता है। विज्ञानमय कोश के बारे में बताते हुए कहा कि इससे बुद्धि के विकास का कोश भी कहते हैं इससे स्मृति शक्ति का विकास,तर्क शक्ति का विकास व कल्पना शक्ति का विकास होता है। आनंदमय कोश के बारे में बताते हुए कहा आपके द्वारा बताया गया कि चित्त का विकास होता है।चित्त शुद्ध वाले व्यक्ति के सब मित्र होते हैं। इस अवसर पर जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक जियालाल जी, संभाग निरीक्षक दिवाकर राम त्रिपाठी,आज के का संचालन करने वाले चंद्र भूषण पांडेय जी सहित प्रशिक्षण कार्यशाला वर्ग में माध्यमिक वर्ग के प्रधानाचार्य बंधु भगिनी उपस्थित रहे। प्रांत प्रचार संयोजक जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रदेश द्वारा बताया गया कि विद्या भारती जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रदेश द्वारा आयोजित प्रांतीय प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग में विद्या भारती के अखिल भारतीय स्तर से लेकर क्षेत्रीय तथा प्रांतीय स्तर के अधिकारी बंधुओं का मार्गदर्शन प्रति सत्र में प्राप्त होता आ रहा है जिससे प्रशिक्षण प्रभावी ढंग से चल रहा है।














