सरस्वती शिशु मंदिर योजना का परिचय – डा० राम मनोहर
सरस्वती शिक्षा मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ग्रामभारती, परितोष, अमेठी में इन दिनों चल रहे नव चयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के चतुर्थ दिवस के अवसर पर विद्या भारती के सह संगठन मंत्री डॉ राम मनोहर द्वारा मां सरस्वती का पूजन अर्चन किया गया।
काशी प्रदेश से आए हुए 57 प्रशिक्षार्थियों को सरस्वती शिशु मंदिर योजना से परिचय कराते हुए उसके बिस्तर पर चर्चा की गई। आपने कहा —-
गायन्ति देवा: किलगीत कानि, धन्यास्तु ते भारत भूमि भागे। स्वर्गापवर्गास्पद मार्ग भूते, भवंति भूय: पुरुषा: सुरत्वात।।
हमें भारत भूमि पर जन्म लेने का गर्व है, हम अपने देश को अनेक नाम से जानते हैं,जैसे- भारत वर्ष,आर्यावर्त, पुण्य भूमि,भरत भूमि, इंडिया, हिन्दुस्तान आदि।
हमारा देश क्यों गुलाम हुआ? इसके पीछे अनेक कारण हैं। जैसे पूर्व काल के राजाओं का विलासिता पूर्ण जीवन, राष्ट्रीय चरित्र का अभाव होना ,भारतीय समाज की चेतना शून्य होना, ऐसे ही अनेक कारणों से हमारा देश पराधीन हो गया। मोहम्मद कासिम से लेकर बहादुर शाह जफर तक का कार्यकाल क्रूरता का कालखंड रहा। उस समय एक हाथ में तलवार तथा दूसरे हाथ में कुरान था। हमारी बहन /बेटियों के साथ अन्याय एवं अत्याचार होता रहता था । लगभग 1100 वर्ष का कालखंड क्रूरता पूर्ण रहा। इसके बाद धूर्तता का कालखंड प्रारंभ हुआ। ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार करने भारत आई फिर क्या हुआ, धीरे-धीरे पूरे देश पर कम्पनी ने आधिपत्य जमा लिया। इसी समय से बच्चे अपने पिता को डैडी, माता को मम्मी कहने लगे। 1835 में लॉर्ड मैकाले ने अपने पिता को एक पत्र लिखा कि आज से हमारे नियम के द्वारा लोग भारतीय तो रहेंगे, किंतु उनकी संस्कृति एवं मानसिकता बदल दी जाएगी। शिक्षा पद्धति को बदलते हुए वहीं से कॉन्वेंट विद्यालय प्रारंभ हुए। जिससे हमारा देश बर्बादी की ओर अग्रसर हो गया। हमारे देश की संस्कृति बदलने के साथ-साथ हमारे संस्कार ,सभ्यता, विचार, प्रेम, स्नेह,भातृत्व पर कुठाराघात किया गया। इतना ही नहीं हमारे कपड़े छोटे हो गए।
विद्या भारती की स्थापना 1952 में हुई । किंतु इसका वृक्ष डॉक्टर केशव राव बलिराम हेडगेवार ने 1925 में ही लगा दिया था। 1952 में सरसंघचालक माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर ने कृष्ण चंद्र गांधी, नानाजी देशमुख के नेतृत्व में भारतीय संस्कारों पर आधारित विद्यालय की शुरुआत की गई। एक भुतही हवेली का चयन करके साफ सफाई करने के बाद उसे सरस्वती शिशु मंदिर के रूप में स्थापित किया गया। 1978 में इसका नाम विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान रखा गया। यह एक समाज पोषित संस्था बनी।
आपने बताया कि हमारा भोजन ,भजन, भ्रमण ,भूषण एवं भाषा अच्छी होनी चाहिए। यह पाठ सरस्वती शिशु मंदिर ही पढ़ाता है। इस अवसर पर प्रदेश निरीक्षक राज बहादुर दीक्षित, सम्भाग निरीक्षक वीरेंद्र सिंह, कमलेश आदि अनेक अधिकारी बंधु मौजूद रहे। विज्ञप्ति काशी प्रदेश प्रचार एवं मीडिया प्रमुख सन्तोष मिश्र।











