प्रांतीय कार्यालय प्रमुख प्रशिक्षण वर्ग के चौथे दिन का वंदना सत्र अत्यंत भव्यता एवं गरिमा के साथ सरस्वती विद्या मंदिर...
प्रान्तीय नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के छठे दिन विविध वैचारिक एवं व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से आचार्यों को समृद्ध किया...
नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के अंतर्गत आज का सत्र अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक रहा। इस अवसर पर क्षेत्रीय बालिका शिक्षा...
इस अवसर पर क्षेत्र के सह प्रशिक्षण प्रमुख आ0 कमलेश कुमार सिंह जी ने विद्यालय विकास में आचार्य की भूमिका...
क्षेत्र के संपर्क प्रमुख "आ. राजेन्द्र बाबू जी" ने “हमारा लक्ष्य” विषय पर मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने लक्ष्य की संकल्पना...
विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश से सम्बद्ध जन शिक्षा समिति, कानपुर प्रान्त द्वारा आयोजित "नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग" के अंतर्गत...
शिशु शिक्षा के सुदृढ़ आधार के लिए "शिशु वाटिका की बारह व्यवस्थाएं" अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये व्यवस्थाएं न केवल बालकों...
कार्यक्रम का शुभारंभ मंचस्थ अतिथियों के परिचय से हुआ, जिसे विद्यालय के यशस्वी प्रधानाचार्य श्री श्रवण कुमार सिंह जी ने...
"ग्रामभारती परतोष, अमेठी" में विद्या भारती काशी प्रांत द्वारा आयोजित "प्रांतीय शिशु वाटिका प्रशिक्षण वर्ग 2026" का शुभारंभ गरिमामय वातावरण...
चरखारी (महोबा) में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित पांच दिवसीय "प्रांतीय कार्यालय प्रमुख प्रशिक्षण वर्ग" का शुभारंभ गरिमामय...
विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रवाद पर आधारित शिक्षा प्रणाली का प्रमुख संस्थान है। इसकी नींव 1952 में गोरखपुर के पक्कीबाग़ में पहले “सरस्वती शिशु मंदिर” के रूप में रखी गई, जो संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान करने का केंद्र बना। 1958 में शिशु शिक्षा प्रबंध समिति का गठन हुआ, और 1977 में इसे अखिल भारतीय पहचान मिली, जिससे विद्या भारती देश का सबसे बड़ा गैर-सरकारी शिक्षा संगठन बन गया। यह संगठन राष्ट्रवादी शिक्षा, संस्कार, योग, संगीत, और चरित्र निर्माण को प्राथमिकता देता है। विद्या भारती भारतीय शिक्षा दर्शन को समृद्ध करने के साथ-साथ आधुनिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा को भी बढ़ावा देती है।
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