
प्रांतीय नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग –
गोरखपुर,
14 जून 2026
शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त द्वारा सरस्वती शिशु मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सुभाषचन्द्र बोस नगर, गोरखपुर में आयोजित प्रान्तीय नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के त्रयोदश दिवस के प्रथम सत्र में अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री मा. यतीन्द्र जी का प्रेरणादायी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
उन्होंने “हमारी वन्दना – अर्थ एवं उसका भावात्मक पक्ष” विषय पर उद्बोधन देते हुए कहा कि वंदना केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि आत्मा को प्रकाशित करने का माध्यम है। हम अपने दिन की शुरुआत माँ शारदा की उपासना से करते हैं, जो ज्ञान, प्रकाश और पवित्रता की प्रतीक हैं।
वंदना के माध्यम से हम माँ भारती, माँ शारदा एवं परमपिता परमेश्वर की आराधना करते हुए अपने अंतर्मन में ज्योति प्रज्वलित करते हैं और उस प्रकाश को सम्पूर्ण विश्व में फैलाने का संकल्प लेते हैं। उन्होंने गुरू के महत्व को बताते हुए कहा कि वही हमें परम सत्य की ओर जागृत करते हैं।
उन्होंने कहा कि वंदना में हम माँ शारदा से कुछ मांगते नहीं, बल्कि उनके स्वरूप का चिंतन करते हैं और अपने जीवन को निष्कलंक, निश्चल एवं लोकमंगलकारी बनाने का संकल्प लेते हैं। माँ की वीणा की तरह हमारे जीवन में भी मधुरता और समरसता का वास हो तथा हमारे आचरण से किसी को कष्ट न पहुंचे—यही सच्ची साधना है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. रामदरश राय ने अपने उद्बोधन में कहा कि बदलते समय के अनुसार स्वयं को तैयार करना आवश्यक है। आज का विद्यार्थी अत्यंत प्रतिभाशाली है, इसलिए आचार्य का उत्तरदायित्व और भी बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान वैश्विक है और सदैव पूजनीय रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है और इसमें शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री राजीव कुमार श्रीवास्तव द्वारा अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया गया। इस अवसर पर वर्गाधिकारी श्री चन्द्रशेखर पाण्डेय, प्रबंध समिति मंत्री डा. अश्वनी कुमार वर्मा, सम्भाग निरीक्षक श्री कन्हैया चौबे सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन श्री अनुराग शुक्ल एवं आभार ज्ञापन डा. शैलेश कुमार सिंह द्वारा किया गया।







