कसया नगर स्थित सरस्वती शिशु मन्दिर में आयोजित प्रांतीय शिशु वाटिका प्रशिक्षण कार्यशाला के पांचवें दिन का शुभारम्भ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। 


इस अवसर पर मुख्य अतिथि माननीय हेमचन्द जी एवं अध्यक्ष श्री विनोद कान्त मिश्रा जी सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों का पारंपरिक अंगवस्त्र से स्वागत किया गया। 
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में हेमचन्द जी ने कहा कि हमारा लक्ष्य भारतीय संस्कृति से ओत-प्रोत, संस्कारित एवं चरित्रवान बालकों का निर्माण करना है। “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव, अतिथि देवो भव” जैसे जीवन मूल्यों को बालकों में विकसित करना ही सच्ची शिक्षा है। 
उन्होंने जीवन को केवल सफल ही नहीं, बल्कि सार्थक बनाने पर बल देते हुए सामाजिक, शैक्षिक एवं धार्मिक कार्यों में सक्रिय सहभागिता का संदेश दिया।















